यह है छठ पूजा

कांच ही बांस के बहन्गिया बहंगी लचकत जाये होईं न बलम जी कहंरिया बहंगी घाटे पहुंचाए…..

धुर-दक्षिणपंथ का आदर्श जोसेफ मैकार्थी

मैकार्थी के इस दक्षिणपंथी हमले के शिकार कई लोग आज दुनिया भर में आदरणीय हैं. कुछ नाम तो बीसवीं सदी के महानतम व्यक्तित्व हैं- अल्बर्ट आइंस्टीन, चार्ली चैप्लिन, बर्तोल्त ब्रेष्ट, हॉवर्ड फास्ट, एलेन गिंसबर्ग, पॉल स्वीजी, ऑरसन वेल्स.

‘स्वदेश तुम कहाँ गुम हो गए…’

इस संग्रह को इसलिए भी पढ़ा जाना चाहिए ताकि हमें अपने वर्तमान के उन अँधेरे कोनों, असुरक्षा के भय और तमाम आशंकाओं का संज्ञान हो सके, जिन्हें हम लगातार देखते-बूझते भी नजरअंदाज़ करते रहते हैं. 

जब पूंजी कांपती है, हम सब कांपते हैं

साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट की चिंताजनक छाया एक बार फिर मंडरा रही है। कार्ल मार्क्स का कहना था कि पैसा इतिहास की धारा तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है और इस पैसे की धारा तय करनेवाली बैंकिंग व्यवस्था को थॉमस जेफरसन आजादी के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते थे। आर्थिक मंदी... Continue Reading →

जल संकट पर भयानक सरकारी लापरवाही

आज जब देश के बहुत बड़े हिस्से में सूखे की स्थिति है और मॉनसून बेहद कमज़ोर है, पानी की उपलब्धता और वितरण को लेकर चिंताएँ जतायी जा रही हैं. इस संकट में एक बार फिर से सालभर पहले आयी (14 जून, 2018) नीति आयोग की एक रिपोर्ट- कंपोज़िट वाटर मैनेजमेंट इंडेक्स- में दिए गए तथ्यों... Continue Reading →

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