अपने ही जाल में उलझा भोजपुरी सिनेमा

जैसे बिहार और पूर्वांचल की राजनीति पिछड़ेपन, भ्रष्टाचार और अन्याय के मुद्दों पर बतकही से चलती है, वैसे ही भोजपुरी सिनेमा की विषय-वस्तु भी इन मुद्दों को सतही तरीके से अभिव्यक्त करती है.

वी. शांताराम: भारतीय सिनेमा के अण्णा साहेब

शांताराम की उपलब्धियों और उनके महत्व का आकलन ठीक से तभी हो सकता है, जब हम उनकी फिल्मों के साथ-साथ सिनेमाई इतिहास में उनके योगदान को हर आयाम से समझने का प्रयास करें.

लाहौरवाले दाता गंज बख़्श

अजमेर के महान सूफ़ी हज़रत मोईनुद्दीन चिश्ती ने लाहौर के सूफ़ी दाता गंज बख़्श साहिब के बारे में कहा था – “गंज बख़्श-ए-फ़ैज़-ए-आलम, मज़हर-ए-नूर-ए-ख़ुदा / नक़ीसान रा पीर-ए-कामिल, कामिलान रा रहनुमा”.

Purulia Arms Dropping: All Botched Up

On the night of 17-18 December, 1995, a foreign plane, with all foreign occupants, named AN-26 dropped a huge consignment of weapons in the fields of West Bengal’s Purulia. Nothing like that had happened before and nothing like that has happened till date.

पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा क्यों नहीं

सरकारी आंकड़ों के हवाले से रिपोर्टों में बताया गया है कि देश में क़रीब 19 लाख बसें हैं, जिनमें से 2.8 लाख राजकीय परिवहन विभागों/निगमों द्वारा चालित हैं या उन्हें परिचालन का परमिट है. सरकार का आकलन है कि आम यात्रियों की ज़रूरत पूरी करने के लिए कम-से-कम 30 लाख बसें चाहिए.

Talking Gulzar

When writings on Indian cinema is either confined to stars or based on the imported theories, this book is a great addition.

अकथ कहानी प्रेम की

यह किताब कबीर को एक नयी रौशनी में समझने की दृष्टि तो देती ही है, साथ ही अबतक की हमारी ऐतिहासिक समझदारी को भी झकझोर देती है.

राजीव गांधी और राजनीति के पेंच

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कामकाज पर बहुत कुछ अच्छा और ख़राब कहा जा सकता है, लेकिन इस सच से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें कई त्रासदियों से गुज़रना पड़ा.

Begum Samru of Sardhana

The charm of her story lies in the details of her maneuvers in continuing her control amidst the tumultuous power struggle among the Mughals, the British, the Marathas, the Jats, the Sikhs, the Rohillas and other such forces.

इंडियन रीडरशिप सर्वे (IRS) की कुछ ख़ास बातें

पूरी रिपोर्ट देखें, तो एक दिलचस्प मामला है. टीवी, रेडियो और पत्रिका में वृद्धि है, पर अख़बार और सिनेमा में मामला सपाट है. लेकिन मीडिया उपभोग में कुल मिलाकर बढ़ोतरी के कारण अख़बार और सिनेमा में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ी है.

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