पत्रकार मार्खेस

मार्खेस का पत्रकारों को संदेश- ‘व्यापक सांस्कृतिक पृष्ठभूमि’ का होना, अमानवीयकरण से बचना, ‘पढ़ना’ और तकनीक पर कम निर्भरता.

तेज़ाब हमले

होना तो यह चाहिए कि फ़िल्म छपाक के हवाले से ही सही, तेज़ाब से पीड़ित लड़कियों की व्यथा, इस अपराध को रोकने के उपायों, दोषियों को दंडित करने आदि पर चर्चा हो.

देविंदर सिंह के हवाले से

संसद हमले और उससे जुड़े किरदारों के बारे में कुछ भी साफ़ नहीं हो सका है. लगता है, संसद हमला मामला एक कभी न ख़त्म होनेवाली कहानी है. किरदारों का आना-जाना लगा रहेगा…

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