क्रिप्टो कथा: स्पष्ट नियमन न होने से बढ़ती अड़चनें  

भाग- एक

दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह भारत में भी क्रिप्टो को लेकर तमाम शंकाएँ और भ्रम हैं, फिर भी निवेशकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. एक क्रिप्टो एक्सचेंज जेमिनी द्वारा नवंबर, 2021 और फ़रवरी, 2022 के बीच कराए गए सर्वे में बताया गया है कि इस अवधि में पहली बार निवेश करनेवाले लोगों में भारतीय पहले पायदान पर हैं. ऐसा पहली बार हुआ है. साल 2021 में पहली बार क्रिप्टो ख़रीदनेवाले सबसे अधिक निवेशक अमेरिका, लैटिन अमेरिका और एशिया-प्रशांत क्षेत्र से थे. 

इस रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि अधिकतर ख़रीदारों ने बढ़ती मुद्रास्फीति को देखते हुए क्रिप्टो में निवेश किया है. अमेरिकियों की तरह पाँच में से दो भारतीयों ने इसे मुद्रास्फीति के असर से बचाव का ज़रिया माना है. उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय से अमेरिका और भारत समेत कई देश ऐतिहासिक रूप से लगातार बढ़ती मुद्रास्फीति की चपेट में हैं और आगामी कई महीनों तक इसमें राहत की गुंजाइश नहीं है. 

जेमिनी की रिपोर्ट के कुछ और आंकड़े दिलचस्प हैं. सर्वे में शामिल लगभग 46 फ़ीसदी भारतीयों ने पहली बार 2021 में क्रिप्टो में निवेश किया है. जो लोग इस साल ख़रीद की योजना बना रहे हैं, उनमें से 22 प्रतिशत लोग 18 से 24 साल के तथा 17 प्रतिशत 45 से 54 साल के हैं. ये आंकड़े 2021 में क्रमश: 17 और 14 फ़ीसदी थे. कम से कम 59 फ़ीसदी भारतीय क्रिप्टो को पैसे के भविष्य के रूप में देखते हैं. 

इन आँकड़ों से यह रूझान तो स्पष्ट है कि हमारे देश में क्रिप्टो को लेकर आकर्षण बढ़ा है, पर 20 देशों के 30 हज़ार लोगों के इस सर्वे में 1706 भारतीय ही शामिल हुए थे. लेकिन पिछले साल ब्रोकर डिस्कवरी फ़र्म ब्रोकरचूज़र ने बताया था कि क्रिप्टो के भारतीय निवेशकों की संख्या 10.07 करोड़ है. इस हिसाब से संख्या के मामले में भारत दुनिया में पहले पायदान पर है. पर आबादी के अनुपात के लिहाज़ से भारत पाँचवे स्थान पर है तथा पहले व दूसरे पायदान पर यूक्रेन और रूस हैं. फिर केन्या और अमेरिका आते हैं. 

लेकिन अप्रैल का महीना कई कारणों से अहम है. इस माह से कराधान की नयी व्यवस्था लागू हुई है. रिपोर्टों की मानें, तो अप्रैल के पहले तीन दिनों में विभिन्न क्रिप्टो एक्सचेंजों में कारोबार में 15 से 55 फ़ीसदी की कमी हुई थी. यह आँकड़ा अब 50 से 70 फ़ीसदी भी हो सकता है. कुछ समय बाद बैंकों ने यूपीआई से लेन-देन बंद कर दिया, जिससे एक्सचेंजों को बड़ा झटका लगना स्वाभाविक था. पर वैश्विक स्तर पर क्रिप्टो निवेश बढ़ने के रूझान को देखते हुए स्थिति में सुधार की उम्मीद है. उल्लेखनीय है कि 20 अप्रैल को बिटक्वाइन 42 हज़ार डॉलर के उच्च स्तर पर पहुँच गया था. 

क्रिप्टो के संदर्भ में दो अन्य ताज़ा ख़बरों का भी संज्ञान लिया जाना चाहिए. देश के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज वज़ीर एक्स के दो संस्थापकों के परिवार समेत दुबई चले जाने की ख़बर चर्चा में है. हालांकि एक्सचेंज भारत से ही काम कर रहा है और उसकी ओर से कहा गया है कि उसके यहाँ काम करनेवाले कहीं से भी काम कर सकते हैं और फ़िलहाल उसके कर्मचारी 70 अलग-अलग जगहों से कार्यरत हैं. उल्लेखनीय है कि 2018 में दो एक्सचेंज ज़ेबपे और वॉल्ड ने सिंगापुर का रुख़ कर लिया था. कुछ एक्सचेंज सिंगापुर में ही पंजीकृत हैं, तो कुछ पहले ही दुबई और अमेरिका जा चुके हैं. वज़ीर एक्स के दो संस्थापक भी ब्लॉकचेन की नयी परियोजनाओं पर काम शुरू कर चुके हैं. 

हमारे देश में नयी कराधान प्रणाली लागू होने और स्पष्ट नियमन के अभाव में क्रिप्टो स्टार्टअप इकोसिस्टम में ऊहापोह की स्थिति है. इसके साथ सरकार और रिजर्व बैंक की तरफ़ से आते उलझाऊ बयान भी अनिश्चित माहौल बनाते हैं. ऐसे में कई स्टार्टअप और उनसे जुड़े प्रतिभावान लोग देश छोड़ रहे हैं. इस प्रतिभा पलायन से हमारे देश में क्रिप्टो और ब्लॉकचेन तकनीक के विकास पर बेहद नकारात्मक असर पड़ सकता है. अमेरिका, दुबई, सिंगापुर, मॉरिशस और केमन आइलैंड में इन प्रतिभाओं का जमावड़ा हो रहा है, जहाँ क्रिप्टो न केवल वैध किया जा चुका है, बल्कि इसके लेन-देन के बारे में नियम-क़ानून भी बनाए गए हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में दुबई में हुए वेब3 आयोजनों में 75 प्रतिशत प्रतिभागी भारतीय थे. 

दूसरी ओर हमारे देश में यह सकारात्मक ख़बर भी है कि ब्लॉकचेन तकनीक से संचालित होनेवाले वेब3 इंटरनेट के लिए बड़ी संख्या में भर्तियाँ निकल रही हैं. विशेषज्ञता वाले रोज़गार से जुड़ी फ़र्म  एक्सफेनो की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में फ़रवरी के महीने में क्रिप्टो से संबंधित 13 हज़ार नौकरियाँ निकाली गयी थीं, जो आवेदन माँगी गयीं कुल तकनीकी नौकरियों का 4.5 प्रतिशत थीं. माँग अधिक होने से अनुभवी लोगों को वेतन के रूप में भारी रक़म की भी पेशकश की जा रही है. अब देखना यह है कि कारोबार में गिरावट और अड़चनों को देखते हुए यह स्थिति कब तक बनी रहती है. हमारे देश में टोकन शुरू करने के बारे में कोई नियम नहीं है. बिना टोकन के कोई भी वेब3 प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सकता है कि क्योंकि इसी से उसमें लोग भागीदार होते हैं और काम आगे बढ़ता है तथा उसके मूल्यांकन में बढ़ोतरी होती है. बहरहाल, यह संतोषजनक है कि स्टार्टअप कंपनियों में निवेश करनेवालों का भरोसा बना हुआ है.     

[क्रमश:]

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